Month: February 2008
Civil Law
इन दिनों हिन्दी ब्लॉगिंग में कॉपीराइट का चर्चा रहा। एक-दो चिट्ठाकार साथियों से बातचीत से ऐसा अनुभव हुआ कि अधिकांश चिट्ठाकारों को कॉपीराइट कानून के सम्बन्ध में प्रारंभिक
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System
हम ने दास युग को नहीं देखा। उस के बारे में हमें इतिहास की पुस्तकों, साहित्य और कुछ अन्य साधनों से ही पता लगता है। दास युग के
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System
पिछले अंक में मैं भारत की न्याय प्रणाली पर गर्व कर रहा था। गलती से मैं ने एक शर्मनाक बात के बारे में लिख गया था। लेकिन उस
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लोकेश जी के ब्लॉग “अदालत” की खबर “चीन भारत के न्यायिक माडल से सीखने का इच्छुक!” हम भारतियों के लिये गर्व करने लायक है और शर्मनाक भी। गर्व
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Crime
वह मध्यवर्गीय व्यापारी परिवार से है। पति-पत्नी और एक बेटी, यही उस का परिवार। कोई छोटा सा ट्रेडिंग का व्यवसाय। आमदनी इतनी कि जिन्दगी मजे में चल जाए।
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Judicial Reform
हम चल रहे थे इस सवाल पर कि अदालतों की संख्या कैसे बढ़े? पर ममता जी का एक मासूम सवाल आ गया। वे परेशान थीं अदालतों के तारीख
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Judicial Reform
पिछली पोस्ट पर पुराणिक जी की टिप्पणी थी “हम तो जी एक बार ही अदालत गये थे,वहां से पांच विषय निकले थे व्यंग्य के। पर एक भी ना
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Judicial Reform
पिछली कड़ी में हम ने देखा था कि हमारे देश में दस लाख की जनसंख्या पर मात्र 10.9 जज हैं और एक जज के पीछे वकीलों की संख्या
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Judicial Reform
देश में कुल आठ लाख वकील। और अदालतें? चौदह हजार मात्र। याने एक अदालत में काम करने को औसतन 57 वकील। जज केवल बारह हजार। याने 66 वकीलों
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