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Month: February 2010

जॉन शोर ने न्यायशुल्क में और वृद्धि की : भारत में विधि का इतिहास-52

जॉन शोर के 1795 के उपायों से भी अदालतों में दीवानी मामलों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आई। उस ने 1797 में पुनः न्यायालय शुल्क में वृद्धि
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न्यायालय शुल्क की वापसी और बनारस में न्यायिक प्रणाली : भारत में विधि का इतिहास-51

जॉन शोर द्वारा 1794 में किए गए सुधारों से न्याय प्रणाली में आए अवरोध दूर हुए,  लेकिन गतिशीलता फिर भी नहीं आ सकी। अदालतों में पेश होने वाले
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पैतृक संपत्ति क्या है? क्या मुझे पिता को उन के पिता से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति में अधिकार है?

मनोज सैनी पूछते हैं — मेरे पिताजी मेरी सौतेली माँ के साथ रहते हैं और मैं और मेरी बहन अपनी माँ के साथ बीस साल से अलग रहता
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जॉन शोर के न्यायिक सुधार : भारत में विधि का इतिहास-50

वारेन हेस्टिंग्स  (1772-1786) और लार्ड कार्नवलिस (1786-1793) ने अपने कार्यकाल के दौरान न्यायिक व्यवस्था के सुधारों पर जोर दिया। दोनों के प्रयासों से न्यायिक व्यवस्था ने देश की
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विधि व्यवसाय का नियमन : भारत में विधि का इतिहास-49

लॉर्ड कार्नवलिस ने 1793 के सातवें विनियम के माध्यम से विधि व्यवसाय का नियमन किया। योग्य और चरित्रवान अधिवक्ताओं को लायसेंस प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई
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राजस्व और दीवानी न्यायालयों का फिर से पृथक्करण : भारत में विधि का इतिहास-47

लॉर्ड कॉर्नवलिस 1787 और 1790 के अपने सुधारों से संतुष्ट न हुआ। ऐसा प्रतीत होता है कि ये दोनों कदम उस के अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के
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दांडिक न्याय प्रशासन में 1790 के सुधार : भारत में विधि का इतिहास-46

लॉर्ड कार्नवलिस द्वारा किए गए सुधार के प्रयत्न महत्वपूर्ण थे। उस ने न्यायालय के कर्मचारियों के वेतनों में वृद्धि कर दी थी, जिन में भारतीय सहायक कर्मचारी भी
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लार्ड कॉर्नवलिस को 1790 के दाण्डिक न्याय प्रशासन में बदलाव : भारत में विधि का इतिहास-45

लॉर्ड कॉर्नवलिस के गवर्नर बनने के समय अपराधिक न्याय प्रशासन में पूरी अराजकता थी। दंड न्यायालयों में शोषण, दमन और भ्रष्टाचार व्याप्त था। जेलें अपराधियों से भरी पड़ी
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