भारत के सर्वोच्च न्यायालय की कुछ विशेष शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-101
भारत के संविधान ने सर्वोच्च न्यायालय को कुछ विशेष शक्तियाँ भी दी हैं। वह अनुच्छेद 71 के अंतर्गत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में उत्पन्न विवाद का निपटारा ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की नियम बनाने की शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-100
संविधान के अनुच्छेद 145 ने सर्वोच्च न्यायालय को न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के सामान्य विनियमन के संबंध में नियम बनाने की शक्ति प्रदान की है जिस के अंतर्गत वह ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के लिए दंडित करने व नियम बनाने की शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-98
अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 129 के अंतर्गत एक अभिलेख न्यायालय है। इसी कारण से इस न्यायालय को अपनी ही ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की अपने ही निर्णयों और आदेशों के पुनर्विलोकन की अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-97
सर्वोच्च न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 137 के अंतर्गत शक्ति प्रदान की गई है कि वह अपने ही निर्णयों और आदेशों का पुनर्विलोकन कर सकेगा। लेकिन उस की यह शक्ति ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की सामान्य अपीलीय अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-93
सर्वोच्च न्यायालय भारत का अंतिम न्यायालय है जहाँ किसी न्यायार्थी को न्याय प्राप्त हो सकता है। इसे सभी प्रकार के मामलों में अपीलीय शक्तियाँ प्राप्त हैं।संवैधानिक मामले-संविधान के अनुच्छेद 132 ... Continue Reading
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ब्रिटिश प्रिवी कौंसिल में भारत से अपीलें : भारत में विधि का इतिहास-88
Posted On 29 May 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Legal History.
भारत में जब पहली बार जब 1726 के चार्टर द्वारा प्रेसीडेंसी नगरों में मेयर के न्यायालय स्थापित किए गए यह उपबंधित किया गया था कि 1000 पैगोडा से अधिक मूल्य ... Continue Reading
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ब्रिटिश प्रिवी कौंसिल : भारत में विधि का इतिहास-87
Posted On 28 May 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Legal History.
ब्रिटिश सम्प्रभुता के क्षेत्रों के लिए ब्रिटिश सम्राट को ही न्याय का उच्चतम स्रोत माना जाता है। इसी कारण से ब्रिटिश सम्राट को उच्चतम अपील न्यायालय के रूप में मान्य ... Continue Reading
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नागपुर में उच्च न्यायालय की स्थापना : भारत में विधि का इतिहास-86
Posted On 23 May 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Legal History.
भारत शासन अधिनियम की धारा 229 (1) में उच्च न्यायालय स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई थी। इस शक्ति का प्रयोग करते हुए मध्य प्रान्त के लिए नागपुर में ... Continue Reading
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भारत शासन अधिनियम 1935 और विधि व्यवस्था : भारत में विधि का इतिहास-84
अगस्त 1935 में ब्रिटिश संसद ने भारत शासन अधिनियम 1935 पारित किया। इस अधिनियम ने 1919 के अधिनियम का स्थान लिया। इस अधिनियम के उपबंधों से भारत में विधान मंडल, ... Continue Reading
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पटना और लाहौर में उच्च न्यायालयों की स्थापना : भारत में विधि का इतिहास-83
पटना उच्च न्यायालयपटना उच्च न्यायालयबिहार और उड़ीसा कलकत्ता प्रेसीडेंसी के ही भाग थे। 1912 में बिहार और उड़ीसा को बंगाल से अलग कर एक अलग प्रांत बनाया गया। तभी यह ... Continue Reading
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