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तीसरा खंबा

तीसरा खंबा

विधि व न्याय को समर्पित प्रथम जालस्थल

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    • Title: फर्जी प्रथम सूचना रिपोर्ट को निरस्त कराने के लिए उच्च न्यायालय में धारा 482 दं.प्र.सं. के अंतर्गत आवेदन करें
      Date Scheduled: 2012-05-20 05:22:58
    • Title: किसी संपत्ति पर उसी का अधिकार है जिस के नाम वह पंजीकृत है
      Date Scheduled: 2012-05-20 05:12:12

कम न्यायालयों के कारण निर्णयों की गति और गुणवत्ता पर बुरे प्रभाव

कम न्यायालयों के कारण निर्णयों की गति और गुणवत्ता पर बुरे प्रभाव
Posted On 06 Jan 2012 By दिनेशराय द्विवेदी. Under System, व्यवस्था.
आप ने विगत आलेख न्याय प्राप्ति एक दुःस्वप्न … में पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री वी.एन. खरे की कलम से जाना था कि भारत में न्याय प्राप्ति की स्थिति क्या है।  ... Continue Reading
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कोई इस आग को लगने से रोक पाएगा?

कोई इस आग को लगने से रोक पाएगा?
Posted On 30 Mar 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
कोई व्यक्ति जब किसी कंपनी में ऐसा नियोजन प्राप्त कर लेता है, जिस में सेवा की अवधि उल्लखित नहीं होती तो सामान्यतः  उस का नियोजन सुरक्षित है, वह ... Continue Reading
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प्रणव दा! सिंह साहब! और सोनिया जी! न्याय के लिए कुछ नहीं, मतलब अन्याय जारी रहेंगे ?

प्रणव दा! सिंह साहब! और सोनिया जी! न्याय के लिए कुछ नहीं, मतलब अन्याय जारी रहेंगे ?
Posted On 02 Mar 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
तीसरा खंबा में 26 जनवरी, 2009 की पोस्ट थी, न्याय रोटी से पहले की जरूरत है, ....जीवन के लिए जितना हवा और पानी आवश्यक है उतना ही न्यायपूर्ण जीवन और ... Continue Reading
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कानून की नजरों में सब समान क्यों नहीं हैं?

कानून की नजरों में सब समान क्यों नहीं हैं?
Posted On 15 Dec 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
 अश्विनी कुमार ने पूछा है - - -कहा जाता है  कि कानून की नजर में हम सब समान हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता। एक बार हम बाइक से जा रहे ... Continue Reading
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जनता की किस को पड़ी है?

जनता की किस को पड़ी है?
Posted On 04 Dec 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
पिछले तीन दिन से कोटा में रहने के बावजूद व्यस्तता रही और 'तीसरा खंबा' पर कोई पोस्ट नहीं जा सकी। इस बीच कानूनी सलाह चाहने वालों के अनेक मेल मिले ... Continue Reading
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विधि मंत्री सपने दिखाने का थिएटर चला रहे हैं?

विधि मंत्री सपने दिखाने का थिएटर चला रहे हैं?
Posted On 18 Nov 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
अब केन्द्रीय विधि मंत्री कह रहे हैं कि केन्द्र सरकार एक ऐसे कानून को बनाने पर विचार कर रही है जिस से न्याय प्राप्त करना नागरिकों का मौलिक अधिकार हो ... Continue Reading
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राज्य की कसौटी

राज्य की कसौटी
Posted On 29 Oct 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
किसी भी राज्य की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना है कि वहाँ न्याय होता हो, अर्थात् यदि कोई व्यक्ति यह महसूस करे कि उस के साथ अन्याय हुआ है तो ... Continue Reading
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अब लगा कि उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च है

अब लगा कि उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च है
Posted On 01 Sep 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Constitution, System, व्यवस्था, संविधान.
कल लगा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय वास्तव में सर्वोच्च है। कानून के राज में कानून सब से बड़ा होना चाहिए। लेकिन जो कानून संसद और विधानसभाओं में रचे जाते ... Continue Reading
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अमरीका की तुलना में भारत में न्याय की संभावना मात्र 10 प्रतिशत

अमरीका की तुलना में भारत में न्याय की संभावना मात्र 10 प्रतिशत
Posted On 25 Aug 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
विगत आलेख क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ? पर तीन महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएँ आईँ।संगीता पुरी जी ने कहा कि 'सजा गल्‍ती की ... Continue Reading
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क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ?

क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ?
Posted On 24 Aug 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
हम भारत में जरूरत की केवल 20 प्रतिशत अदालतों से देश में न्यायालयों की कमी ने अनेक समस्याएँ खड़ी की हैं और लगातार हो रही हैं। अदालतों की इस कमी ... Continue Reading
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