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तीसरा खंबा

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विधि व न्याय को समर्पित प्रथम जालस्थल

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    • Title: फर्जी प्रथम सूचना रिपोर्ट को निरस्त कराने के लिए उच्च न्यायालय में धारा 482 दं.प्र.सं. के अंतर्गत आवेदन करें
      Date Scheduled: 2012-05-20 05:22:58
    • Title: किसी संपत्ति पर उसी का अधिकार है जिस के नाम वह पंजीकृत है
      Date Scheduled: 2012-05-20 05:12:12

न्याय प्रणाली में सुधार आवश्यक है जिस से पक्षकार या वकील उसे लंबा न कर सकें

न्याय प्रणाली में सुधार आवश्यक है जिस से पक्षकार या वकील उसे लंबा न कर सकें
Posted On 21 Sep 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, न्यायिक सुधार.
बिजनेस स्टेंडर्ड के 18 सितंबर 2011 के अंक में एम. जे. एंटनी के एक लेख का हिन्दी अनुवाद वकीलों की चालबाजी से लंबी खिंच जाती है मुकदमे बाजी शीर्षक से ... Continue Reading
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लोक अदालतें : मुक्ति यज्ञ

लोक अदालतें : मुक्ति यज्ञ
Posted On 26 Jul 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, न्यायिक सुधार.
राजस्थान की अदालतों के लिए यह सप्ताह लोकअदालतों का है। सभी अदालतों ने अपने यहाँ लंबित मुकदमों में से छाँट छाँट कर एक सूची बनाई है और पक्षकारों को नोटिस ... Continue Reading
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हमारी सरकारें अभी भी भारत को अपना देश नहीं समझतीं

हमारी सरकारें अभी भी भारत को अपना देश नहीं समझतीं
Posted On 03 Jul 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under System, व्यवस्था.
कुछ दिन पूर्व एक समचार चैनल पर एक वरिष्ठ अधिवक्ता का साक्षात्कार प्रस्तुत किया जा रहा था। समस्या थी जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की। इन कैदियों को जेलों में ... Continue Reading
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पैबंद लगी पैरहन

पैबंद लगी पैरहन
Posted On 05 Apr 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
कल के आलेख न्यायालयों की श्रेणियाँ और उन में न्यायाधीशों की नियुक्तियाँ पर सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी की टिप्पणी थी कि "इसमें परिवार न्यायालयों, उपभोक्ता फोरम व विविध ट्रिब्यूनल्स के बारे ... Continue Reading
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प्रणव दा! सिंह साहब! और सोनिया जी! न्याय के लिए कुछ नहीं, मतलब अन्याय जारी रहेंगे ?

प्रणव दा! सिंह साहब! और सोनिया जी! न्याय के लिए कुछ नहीं, मतलब अन्याय जारी रहेंगे ?
Posted On 02 Mar 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
तीसरा खंबा में 26 जनवरी, 2009 की पोस्ट थी, न्याय रोटी से पहले की जरूरत है, ....जीवन के लिए जितना हवा और पानी आवश्यक है उतना ही न्यायपूर्ण जीवन और ... Continue Reading
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क्यों उठते हैं न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न, बार-बार

क्यों उठते हैं न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न, बार-बार
Posted On 06 Jan 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
पिछले दिनों मेरे ही एक संबंधी के पुत्र को 498-ए में गिरफ्तार किया गया। हम करीब साल भर पहले से यह जानते थे कि ऐसी स्थिति आ सकती है। लेकिन ... Continue Reading
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अगले दस वर्षों में एक लाख जज नियुक्त करने होंगे

अगले दस वर्षों में एक लाख जज नियुक्त करने होंगे
Posted On 01 Jan 2011 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारत में 4,30,000 लोग जेलों में बंद हैं, जिन में से तीन लाख बंदी केवल इसलिए बंद हैं कि उन के मुकदमे का निर्णय होना है। ... Continue Reading
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विधि मंत्री सपने दिखाने का थिएटर चला रहे हैं?

विधि मंत्री सपने दिखाने का थिएटर चला रहे हैं?
Posted On 18 Nov 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
अब केन्द्रीय विधि मंत्री कह रहे हैं कि केन्द्र सरकार एक ऐसे कानून को बनाने पर विचार कर रही है जिस से न्याय प्राप्त करना नागरिकों का मौलिक अधिकार हो ... Continue Reading
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अमरीका की तुलना में भारत में न्याय की संभावना मात्र 10 प्रतिशत

अमरीका की तुलना में भारत में न्याय की संभावना मात्र 10 प्रतिशत
Posted On 25 Aug 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
विगत आलेख क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ? पर तीन महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएँ आईँ।संगीता पुरी जी ने कहा कि 'सजा गल्‍ती की ... Continue Reading
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क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ?

क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ?
Posted On 24 Aug 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Judicial Reform, System, न्यायिक सुधार, व्यवस्था.
हम भारत में जरूरत की केवल 20 प्रतिशत अदालतों से देश में न्यायालयों की कमी ने अनेक समस्याएँ खड़ी की हैं और लगातार हो रही हैं। अदालतों की इस कमी ... Continue Reading
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