न्याय प्राप्ति एक दुःस्वप्न …पूर्व मुख्य न्यायाधीश वी.एन.खरे
भारत में न्याय प्राप्ति का स्वप्न एक दुःस्वप्न बन चुका है। उस का कारण न्याय प्राप्ति में देरी है। हर वर्ष सरकार उस के लिए अनेक कदम उठाती है लेकिन ... Continue Reading
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न्याय प्रणाली में सुधार आवश्यक है जिस से पक्षकार या वकील उसे लंबा न कर सकें
बिजनेस स्टेंडर्ड के 18 सितंबर 2011 के अंक में एम. जे. एंटनी के एक लेख का हिन्दी अनुवाद वकीलों की चालबाजी से लंबी खिंच जाती है मुकदमे बाजी शीर्षक से ... Continue Reading
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हमारी सरकारें अभी भी भारत को अपना देश नहीं समझतीं
कुछ दिन पूर्व एक समचार चैनल पर एक वरिष्ठ अधिवक्ता का साक्षात्कार प्रस्तुत किया जा रहा था। समस्या थी जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की। इन कैदियों को जेलों में ... Continue Reading
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पैबंद लगी पैरहन
कल के आलेख न्यायालयों की श्रेणियाँ और उन में न्यायाधीशों की नियुक्तियाँ पर सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी की टिप्पणी थी कि "इसमें परिवार न्यायालयों, उपभोक्ता फोरम व विविध ट्रिब्यूनल्स के बारे ... Continue Reading
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अगले दस वर्षों में एक लाख जज नियुक्त करने होंगे
सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारत में 4,30,000 लोग जेलों में बंद हैं, जिन में से तीन लाख बंदी केवल इसलिए बंद हैं कि उन के मुकदमे का निर्णय होना है। ... Continue Reading
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विधि मंत्री सपने दिखाने का थिएटर चला रहे हैं?
अब केन्द्रीय विधि मंत्री कह रहे हैं कि केन्द्र सरकार एक ऐसे कानून को बनाने पर विचार कर रही है जिस से न्याय प्राप्त करना नागरिकों का मौलिक अधिकार हो ... Continue Reading
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न्यायिक सुधार – ऊँट के मुहँ में जीरे के समान भी नहीं
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भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम 1861 : भारत में विधि का इतिहास-77
ब्रिटिश संसद ने 1861 में भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम पारित किया और इसी के साथ भारत में उच्च न्यायालयों के इतिहास का आरंभ हुआ। इस अधिनियम द्वारा ब्रिटिश क्राउन को ... Continue Reading
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उच्च न्यायालयों की स्थापना के लिए अधिनियम : भारत में विधि का इतिहास-76
ब्रिटिश भारत में 1861 तक जो न्यायिक व्यवस्था विकसित हुई थी वे दो भिन्न प्रकार की थीं। प्रेसीडेंसी नगरों मद्रास, कलकत्ता और मुम्बई में सुप्रीम कोर्ट स्थापित थे जो ब्रिटिश ... Continue Reading
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पंजाब की न्यायिक व्यवस्था : भारत में विधि का इतिहास-74
पंजाब को 1849 में ब्रिटिश भारत में सम्मिलित कर लिया गया। वहाँ जो न्यायिक व्यवस्था स्थापित की गई वह एक ही प्राधिकारी के अधीन सौंपी गई, जिसे न्यायिक आयुक्त (Judicial ... Continue Reading
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