कम न्यायालयों के कारण निर्णयों की गति और गुणवत्ता पर बुरे प्रभाव
आप ने विगत आलेख न्याय प्राप्ति एक दुःस्वप्न … में पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री वी.एन. खरे की कलम से जाना था कि भारत में न्याय प्राप्ति की स्थिति क्या है। ... Continue Reading
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हमारी सरकारें अभी भी भारत को अपना देश नहीं समझतीं
कुछ दिन पूर्व एक समचार चैनल पर एक वरिष्ठ अधिवक्ता का साक्षात्कार प्रस्तुत किया जा रहा था। समस्या थी जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की। इन कैदियों को जेलों में ... Continue Reading
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कोई इस आग को लगने से रोक पाएगा?
कोई व्यक्ति जब किसी कंपनी में ऐसा नियोजन प्राप्त कर लेता है, जिस में सेवा की अवधि उल्लखित नहीं होती तो सामान्यतः उस का नियोजन सुरक्षित है, वह ... Continue Reading
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प्रणव दा! सिंह साहब! और सोनिया जी! न्याय के लिए कुछ नहीं, मतलब अन्याय जारी रहेंगे ?
तीसरा खंबा में 26 जनवरी, 2009 की पोस्ट थी, न्याय रोटी से पहले की जरूरत है, ....जीवन के लिए जितना हवा और पानी आवश्यक है उतना ही न्यायपूर्ण जीवन और ... Continue Reading
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कानून की नजरों में सब समान क्यों नहीं हैं?
अश्विनी कुमार ने पूछा है - - -कहा जाता है कि कानून की नजर में हम सब समान हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता। एक बार हम बाइक से जा रहे ... Continue Reading
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जनता की किस को पड़ी है?
पिछले तीन दिन से कोटा में रहने के बावजूद व्यस्तता रही और 'तीसरा खंबा' पर कोई पोस्ट नहीं जा सकी। इस बीच कानूनी सलाह चाहने वालों के अनेक मेल मिले ... Continue Reading
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विधि मंत्री सपने दिखाने का थिएटर चला रहे हैं?
अब केन्द्रीय विधि मंत्री कह रहे हैं कि केन्द्र सरकार एक ऐसे कानून को बनाने पर विचार कर रही है जिस से न्याय प्राप्त करना नागरिकों का मौलिक अधिकार हो ... Continue Reading
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राज्य की कसौटी
किसी भी राज्य की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना है कि वहाँ न्याय होता हो, अर्थात् यदि कोई व्यक्ति यह महसूस करे कि उस के साथ अन्याय हुआ है तो ... Continue Reading
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अब लगा कि उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च है
कल लगा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय वास्तव में सर्वोच्च है। कानून के राज में कानून सब से बड़ा होना चाहिए। लेकिन जो कानून संसद और विधानसभाओं में रचे जाते ... Continue Reading
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जनता को न्याय प्रदान करने में किसी राजनैतिक दल की कोई रुचि नहीं
भारत को आजादी मिले 63 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन न्याय की स्थिति बेहतर से बदतर ही हुई है। लगता है सरकारों को न्याय व्यवस्था से कोई सरोकार नहीं है। ... Continue Reading
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