भारत के सर्वोच्च न्यायालय की कुछ विशेष शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-101
भारत के संविधान ने सर्वोच्च न्यायालय को कुछ विशेष शक्तियाँ भी दी हैं। वह अनुच्छेद 71 के अंतर्गत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में उत्पन्न विवाद का निपटारा ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की नियम बनाने की शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-100
संविधान के अनुच्छेद 145 ने सर्वोच्च न्यायालय को न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के सामान्य विनियमन के संबंध में नियम बनाने की शक्ति प्रदान की है जिस के अंतर्गत वह ... Continue Reading
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उपचारात्मक याचिका (Curative Petition) एक अंतिम न्यायिक उपाय : भारत में विधि का इतिहास-99
Posted On 22 Jun 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Constitution, Legal Advice, System, विधिक इतिहास, व्यवस्था, संविधान.
इन दिनों यह बात चर्चा में है कि जब भोपाल त्रासदी के अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए धारा 304 भाग दो दं.प्र.सं. के आरोपों को भारत का सर्वोच्च न्यायालय अपने ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के लिए दंडित करने व नियम बनाने की शक्तियाँ : भारत में विधि का इतिहास-98
अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 129 के अंतर्गत एक अभिलेख न्यायालय है। इसी कारण से इस न्यायालय को अपनी ही ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की अपने ही निर्णयों और आदेशों के पुनर्विलोकन की अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-97
सर्वोच्च न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 137 के अंतर्गत शक्ति प्रदान की गई है कि वह अपने ही निर्णयों और आदेशों का पुनर्विलोकन कर सकेगा। लेकिन उस की यह शक्ति ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की परामर्श प्रदान करने की अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-96
संविधान के अनुच्छेद 143 से सर्वोच्च न्यायालय को परामर्श देने की अधिकारिता प्रदान की गई है। इस उपबंध के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति उन के समक्ष कुछ विशिष्ठ परिस्थितियाँ उत्पन्न ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की रिटें जारी करने की अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-95
भारत के सर्वोच्च न्यायालय को उस की अपीलीय और आरंभिक अधिकारिता के अतिरिक्त संविधान में नागरिकों को प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उचित कार्यवाहियाँ करने की अधिकारिता संविधान ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की विशेष अनुमति से अपीलीय अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-94
सर्वोच्च न्यायालय भारत का अंतिम और उच्चतम न्यायिक निकाय है। यही कारण है कि उसे संविधान के अनुच्छेद 136 के अंतर्गत विशेष अनुमति से अपील सुनने का प्राधिकार दिया गया ... Continue Reading
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सर्वोच्च न्यायालय की सामान्य अपीलीय अधिकारिता : भारत में विधि का इतिहास-93
सर्वोच्च न्यायालय भारत का अंतिम न्यायालय है जहाँ किसी न्यायार्थी को न्याय प्राप्त हो सकता है। इसे सभी प्रकार के मामलों में अपीलीय शक्तियाँ प्राप्त हैं।संवैधानिक मामले-संविधान के अनुच्छेद 132 ... Continue Reading
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नागपुर में उच्च न्यायालय की स्थापना : भारत में विधि का इतिहास-86
Posted On 23 May 2010 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Legal History.
भारत शासन अधिनियम की धारा 229 (1) में उच्च न्यायालय स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई थी। इस शक्ति का प्रयोग करते हुए मध्य प्रान्त के लिए नागपुर में ... Continue Reading
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