न्याय प्रणाली में सुधार आवश्यक है जिस से पक्षकार या वकील उसे लंबा न कर सकें
बिजनेस स्टेंडर्ड के 18 सितंबर 2011 के अंक में एम. जे. एंटनी के एक लेख का हिन्दी अनुवाद वकीलों की चालबाजी से लंबी खिंच जाती है मुकदमे बाजी शीर्षक से ... Continue Reading
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लोक अदालतें : मुक्ति यज्ञ
राजस्थान की अदालतों के लिए यह सप्ताह लोकअदालतों का है। सभी अदालतों ने अपने यहाँ लंबित मुकदमों में से छाँट छाँट कर एक सूची बनाई है और पक्षकारों को नोटिस ... Continue Reading
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प्रणव दा! सिंह साहब! और सोनिया जी! न्याय के लिए कुछ नहीं, मतलब अन्याय जारी रहेंगे ?
तीसरा खंबा में 26 जनवरी, 2009 की पोस्ट थी, न्याय रोटी से पहले की जरूरत है, ....जीवन के लिए जितना हवा और पानी आवश्यक है उतना ही न्यायपूर्ण जीवन और ... Continue Reading
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अगले दस वर्षों में एक लाख जज नियुक्त करने होंगे
सरकारी आँकड़ों के अनुसार भारत में 4,30,000 लोग जेलों में बंद हैं, जिन में से तीन लाख बंदी केवल इसलिए बंद हैं कि उन के मुकदमे का निर्णय होना है। ... Continue Reading
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अमरीका की तुलना में भारत में न्याय की संभावना मात्र 10 प्रतिशत
विगत आलेख क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ? पर तीन महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएँ आईँ।संगीता पुरी जी ने कहा कि 'सजा गल्ती की ... Continue Reading
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क्या हम न्यायपूर्ण समाज की स्थापना से पलायन का मार्ग नहीं तलाश रहे हैं ?
हम भारत में जरूरत की केवल 20 प्रतिशत अदालतों से देश में न्यायालयों की कमी ने अनेक समस्याएँ खड़ी की हैं और लगातार हो रही हैं। अदालतों की इस कमी ... Continue Reading
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न्यायिक सुधार – ऊँट के मुहँ में जीरे के समान भी नहीं
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500 वाँ आलेख, 50000 चटके और बेटी का जन्मदिन
28 अक्टूबर 2007 को जब तीसरा खंबा का पहला आलेख लिखा गया था तब सोचा भी न था कि ये तकरीबन ढाई वर्ष का समय यूँ ही निकल जाएगा। बस ... Continue Reading
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मुकदमों के निपटारे की अवधि कम करने की कवायद
केन्द्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली जिस ऊर्जावान रीति से बयान जारी कर रहे हैं उसी रीति से परिणाम भी ले कर आएँ तो देश में प्रतिष्ठा खोती जा रही न्याय प्रणाली ... Continue Reading
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एक सही न्याय व्यवस्था के लिए भी इंकलाब से ही गुजरना पड़ेगा
जरा ये खबर देखिए.....20 साल बाद मिलावट प्रकरण में सजा उदयपुर की एक अदालत ने बीस साल बाद हल्दी व मिर्च पाउडर में मिलावट ... Continue Reading
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