जजों के एक तिहाई पद रिक्त: उच्च न्याया
इस के लेख़क हैं Dinesh Rai Dwivedi   
Sunday, 26 October 2008

आज कानून से संबंधित एक समाचार तीसरा खंबा के सहयोगी ब्लाग अदालत पर है, उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 266 पद रिक्त

यह समाचार न्याय प्रणाली की दुर्दशा को प्रदर्शित करता है। एक और देश के उच्चन्यायालयों में लाखों मुकदमें लम्बित हैं और दूसरी ओर देश के उच्च न्यायालयों में 226 पद रिक्त पड़े हैं। यह अवस्था सदैव ही बनी रहती है। क्यों कि हमारे यहाँ जब पद रिक्त हो जाते हैं तो उन पर नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। जो आम तौर पर बहुत लम्बी होती है। नतीजा यह है कि कहने को हमारे पास अदालतें हैं लेकिन काम करने वाली अदालतें कितनी हैं? 886 में से 266 पद रिक्त होने का अर्थ है कि हमारे उच्च न्यायालयों की क्षमता का केवल दो तिहाई उपयोग हो रहा है। यह न केवल चिंताजनक है अपितु हमारी न्याय प्रणाली के लिए शर्मनाक भी है।


हम कभी भी नहीं सुनते-पढ़ते कि किसी उच्चन्यायालय के न्यायाधीश ने स्वयं पद त्याग दिया हो। इस का सीधा अर्थ है कि जो भी पद रिक्त होते हैं वे सभी प्रक्रिया के दौरान न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने के कारण ही होते हैं या फिर सुप्रीमकोर्ट में पदोन्नति के कारण। अर्थात पहले से यह जानकारी रहती है कि कब कितने पद रिक्त होने हैं। इस कारण से यह भी व्यवस्था की जा सकती है कि पद के रिक्त होने के पूर्व ही उसे भरे जाने की व्यवस्था कर ली जाए।

 

आखरी बार संपादन किया गया ( Tuesday, 28 October 2008 )
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वकील भी आते हैं उपभोक्ता कानून के दायर
इस के लेख़क हैं Dinesh Rai Dwivedi   
Sunday, 26 October 2008

25 अक्टूबर के आलेख कानूनी सलाह : डॉक्टर की शिकायत कहाँ की जाए पर बड़े भाईडा० अमर कुमार की सलाह मिली....

 

 

 

अमाँ पंडित जी, यह तो वह पता कर ही लेता, आपके सारे दाँत अभी तो झड़े न होंगे ? फिर दाँत रख कर, काहे दाँतों के डाक्टर से बैर.. हा हा हाहः.. कल को कोई दाँत का डाक्टर हाथ भी न लगायेगा, तो ?

बडे़ भाई की सलाह सिर माथे। उन के विनोद के वैसे भी हम आशिक हैं। पर कभी कभी ऐसा भी कह जाते हैं कि मजा तीसरे रोज आता है। पर मैं भी एक प्रोफेशनल ही हूँ। वकील के साथ कोई हादसा हो जाए तो सारे वकील खड़े हो जाते हैं। मुकदमा बन गया और खुदा न खास्ता वकील शिकायत कर्ता हुआ तो अभियुक्त की जमानत मुश्किल हो जाती है। उसे कोई वकील तक नहीं मिलता। भले ही मुकदमा फर्जी ही क्यों न हो। पर फिर मुकदमे में वकील ही पैरवी करता है और उसे बरी भी करवाता है। मुझे भी विश्वास है कि कोई तो दांतों का डाक्टर जरूर मिलेगा। एक दो दंत-चिकित्सक तो ब्लागरी में हैं  ही तब तक कुछ और हो जाएँगे। कोई तो साथ देगा ही। नहीं तो हमारी श्रीमतीजी जितना अच्छा ठोस पकाती हैं, उतना ही अच्छा तरल भी पका ही सकती हैं। एक बात और कि शोभा दांतों की भी ठीकठाक चिकित्सक हैं। पास में एक अस्पताल है। उस में आए कुछ परिचित मरीज भीड़ छंटने तक मिलने हमारे यहाँ चले आए। उन्होंने अपने पास से दवा दे कर चलता किया और दो एक बरस में तो उन्हें डाक्टर के यहाँ जाने की जरूरत न हुई। फिर आगे होहिहीं वही जो राम रचि राखा। करनी करते वक्त परिणाम से काहे डरो। वैसे कोई भी डाक्टर मुझे खुशी खुशी हाथ लगाएगा।

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लघुत्तम आलेख - मेरे घर दीवाली आ गई है
इस के लेख़क हैं Dinesh Rai Dwivedi   
Saturday, 25 October 2008

पूर्वा (बेटी) अभी-अभी घर पहुँची है,
 वैभव (बेटा) परसों दोपहर ही पहुँच चुका था,
 मेरे घर दीवाली आ गई है।






आप सभी को दीपावली पर ढेरों शुभ कामनाएँ!
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